सोमवार, 17 मई 2010

बाघ १४११





रहने दो आशियाँ मेरा भी

मेरी भी ईश ने रचना की


वाहन बना भवानी माँ का

हूँ बाघ शान भारत माँ की


क्यूँ मारता मुझे है मानव

क्यूँ मैं बना सभी का दोषी


गिनती हजार की है केवल

संख्या बहुत बची कम मेरी


अस्तित्व गर मिटाया मेरा

हो जाएगी समाप्त सृष्टी


हैं ये हरे वसन धरती के

मत काट तन सघन वन शाखी



(चित्र गूगल सर्च से साभार)

16 टिप्‍पणियां:

  1. वाह! बहुत सुन्दर प्रस्तुति, इस रचना के माध्यम से आपने एक बहुत ही सुन्दर बात कही है, पर्यावरण के साथ ही जीव जंतुओं को भी बचना हमारा कर्त्तव्य है!

    उत्तर देंहटाएं
  2. अस्तित्व गर मिटाया मेरा
    हो जाएगी समाप्त सृष्टी
    बहुत सुन्दर
    विचारणीय भी

    उत्तर देंहटाएं
  3. कवियों को परकाया प्रवेशी भी माना गया है !
    बाघ की संवेदना का मूर्तीकरण किया है आपने !
    मानव की गलत नीतियों और स्वार्थी स्वभाव से
    दुखी बाघ का कातर स्वर साफ़ देखा जा सकता
    है , आपकी इन पंक्तियों में !
    सही कहा आपने --- '' हैं ये हरे वसन धरती के .. '' |
    आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  4. 'Save Tiger' project को समर्पित इस रचना की जितनी प्रशंसा की जाए, कम है. एक बाघ की पुकार, वो भी गजल फ़ार्म में, अद्भुत. आपने मेहनत नहीं, बहुत मेहनत की है.

    उत्तर देंहटाएं
  5. जागरूकता भरी सार्थक प्रस्तुति के लिए धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  6. बाघ के समर्थन में लिखी बेहतरीन कविताओं में से एक कविता..बाघ को बचाने के बाघ की अपील और उसी के द्वारा सुझाया गया उपाय मैंने भी लिखने की कोशिश की है.. कुछ दिनों बाद पोस्ट करूंगा.

    उत्तर देंहटाएं
  7. हमारी राष्ट्रीय संपत्ति , हमारी धरोहर ,
    हमारे स्वच्छ पर्यावरण के साक्षी ...बाघ
    ऐसे निर्दोष प्राणी के मन की बात को
    आपने अपनी भावनाओं में ढाल कर
    एक बहुत अच्छी रचना प्रस्तुत की है
    आपका आह्वान जन-जन तक पहुंचे ,
    यही प्रार्थना है .

    उत्तर देंहटाएं
  8. आज हर तरीके से हमारी कोशिश यही होनी चाहिए कि वन को एवं वन्य जीवों को बचाया जाए, क्योंकि तभी हम भी बचे रह पाएंगे।
    --------
    क्या हमें ब्लॉग संरक्षक की ज़रूरत है?
    नारीवाद के विरोध में खाप पंचायतों का वैज्ञानिक अस्त्र।

    उत्तर देंहटाएं
  9. बाघ आपकी रचना को पढकर प्रसन्न हैं ।
    लोकोपयोगी रचना ।

    उत्तर देंहटाएं
  10. सार्थक संदेश देती है आपकी रचना ... सच में सबको बचाना ही असली धर्म है ....

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत सुन्दर सन्देश !
    सचमुच एक बेहतरीन रचना पेश किया है आपने.

    उत्तर देंहटाएं
  12. आपका ब्लॉग देखा बहुत ही अच्छा लगा।

    उत्तर देंहटाएं