शनिवार, 24 सितंबर 2011


पहचान लेगा कोई जौहरी तुझको भी 
अपनी चमक को न तू धुंधली पड़ने दे 

6 टिप्‍पणियां:

  1. बरबस ही एक शेर याद आ गया...
    अपनी कीमत सुनकर क्यूँ हो उदास
    क्या इस शहर में एक ही बाज़ार है.

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  2. संगीता जी, सुलभ जी , मनोज जी आप सभी का यहाँ आने का बहुत बहुत शुक्रिया...

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