सोमवार, 11 नवंबर 2019

ये देसी खिलौने

आज भी मिलते हैं ये झुनझुने और भोंपू
लेकिन आजकल के बच्चे इससे नहीं खेलते
फिर भी क्यों बनते हैं ऐसे खिलौने?
कौन खरीदता होगा इन्हें?
आपका बच्चा इनको लेने की जिद्द तो करता न होगा?
यदि जिद्द करे तो क्या खरीदेंगे आप?
क्या यूँ ही नहीं खरीद लेंगे अपने बच्चे के लिए?
या फिर किसी बच्चे को देने के लिए?


7 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज सोमवार 11 नवम्बर 2019 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. बनते रहने चाहिए खरीदार मिल ही जाते हैं कहीं न कहीं से
    हम भी खरीदते हैं मेलों से ऐसी चीजे, एक लगाव रहता है। आकर्षक होते हैं बच्चे खरीद लेते हैं

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  3. व्वाहहहह..
    बचपन याद आ गया..
    आभार..
    सादर..

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  4. बहुत सुंदर।
    जी बच्चे तो बच्चे होते हैं मचलते हैं लेने को तो बहुत बार खरीद लेते हैं ,वैसे हर नुक्कड़ पर बिक रहे होते हैं तो जरूर बिकते होंगें।
    देखा है कई बार उनके सामने अभिभावकों को बच्चों की अंगुली पकड़े।

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