गुरुवार, 9 जुलाई 2009

सावन के बहाने ...


सावन के बहाने अश्कों को हम बहा आए
आसमां से दर्द का इक रिश्ता निबहा आए

सुलगते अरमानों को धुआं बनाकर
घटाओं के परिंदों को हम उड़ा आए

अश्कों की बूंदों से नमी को जब्ज कर
बादलों के दिल की आब पाशी करा आए

जज्बा-ए-दिल की शमा को पिघलाकर
बरसते सावन में दर्द को हम घुला आए

सूखे पत्तों से झड़ गए वो लम्हे उल्फत के
उन लम्हों की यादों को किताबों में दबा आए

खूने दिल के कतरों से सियाही लेकर
दास्ताने दर्द की इक ग़ज़ल हम बना आए


(चित्र गूगल सर्च से साभार )

35 टिप्‍पणियां:

  1. वाह वाह वाह !!!! अर्चनाजी वाह.........क्या कमाल की गजल लिखी है आपने.....आनंद आ गया पढ़कर ....

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी कविता बहुत अच्छी लगी, उस से भी अच्छा लगा आपका विचार.

    उत्तर देंहटाएं
  3. archana ji sadar namaskar.....mere cartoon par tippani ke liye dhanyawad....vaise mujh cartoonist ko kavita[gajal] ki samajh kam he hai....apki rachna ka jawab nahi.....

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपकी कविता अच्ची है लेकिन बिम्ब सभी पुराने है कुछ नये बिम्बों को लेकर रचना कीजिये आप में वह क्षमता है

    उत्तर देंहटाएं
  5. ... प्रभावशाली व प्रसंशनीय गजल !!!!!!

    उत्तर देंहटाएं
  6. सुकुमार भावों की सशक्‍त अभिव्‍यक्ति। बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  7. तेरे ग़म को जाँ की तलाश थी तेरे जाँ-निसार चले गये
    तेरी राह में करते थे सर तलब सर-ए-राह-गुज़ार चले गये

    उत्तर देंहटाएं
  8. सुन्दर तस्वीर के साथ सुन्दर रचना आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  9. आप की रचना बहुत अच्छी लगी....बहुत बहुत बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  10. Savan ke bahane behad sundar gazal..badhai !!
    "शब्द सृजन की ओर" पर इस बार पढें "ऑरकुट की कहानी"....

    उत्तर देंहटाएं
  11. अत्यन्त सुंदर भाव!!
    ये पहली नही है इससे पहले भी पढ़ा चुका हूँ आप की हर कविता भावपूर्ण होती है,शब्दों का इतना सटीक एवम् सुंदर प्रयोग सचमुच खो जाने को आता है..

    बधाई..हो!!!!

    उत्तर देंहटाएं
  12. सावन के बहाने......
    अति सुन्दर बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  13. अर्चना जी!
    सावन का भाव लिए आपकी यह सुन्दर रचना है।
    बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  14. Sawan men apne achhi kavya-dhara bahayi.Ab mere blog par akar sawan ka prasad bhi chakh len.

    उत्तर देंहटाएं
  15. Blogger Shama said...

    अर्चनाजी ,
    एक जवाब तो यहीँ दे रही हूँ ...ये 'फूल ' या' कली',प्रतीकात्मक है ..इसका मानवी जीवन से सम्बन्ध है ..एक लडकी का जन्म ..जो होने नही दिया ...माँ की कोख में ही उसे मार डाला गया...किसी 'womens' day" पे रचना लिखी थी...ये औरत का अपमान है..मातृत्व का अपमान..माली अन्य कोई नही...पुरूष सत्तात्मक समाज है...स्वयं पिता है...मैंने ऐसे पिता देखे हैं, जिन्हों ने अपनी पत्नी के गर्भावस्था में ही 'स्त्री' भ्रूण को गिरा दिया...

    Aapkee phoolon kee pratee samvednaa bhee samajh saktee hun...!
    Poojake liye kitne berahmee se phool tod liye jaate hain..! Jabki, gar unhen sahee tareeqe se kaat ke paanee me daal phool daan me sajaya jaay,to unkee umr badhatee hai..!

    उत्तर देंहटाएं
  16. Ye jawab to aapki tippanee ka hua..
    Ab aapkee rachnayen jo padhee to mook ho gayee hun...!
    Aur saath hee me us rachnaa se mel khata aprateem chitr...! Wah!

    http://shamasansmaran.blogspot.com

    http://kavitasbyshama.blogspot.com

    http://aajtakyahantak-thelightbyalonelypath.blogspot.com

    http://shama-baagwaanee.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  17. सुन्दर रचना है आपकी, अगर कुछ कह सकूं तो बस इतना के:

    बाद्लों को रूलाने आ गये,
    दर्द दिल का दिखाने आ गये,
    बाद्लों का पानी न कम पडे,
    अपने आंसू मिलाने आ गये.

    Do visit, "सच में"at: (www.sachmein.blogspot.com)

    उत्तर देंहटाएं
  18. खूने दिल के कतरों से सियाही लेकर
    दास्ताने दर्द की इक ग़ज़ल हम बना आए

    bahut sundar ghazal.badhai!!!!!

    उत्तर देंहटाएं
  19. बहुत अच्छा लिखा है आपने । भावपूर्ण विचारों की कलात्मक अभिव्यक्ति सहज ही प्रभावित करती है । भाषा की सहजता और तथ्यों की प्रबलता से आपका शब्द संसार वैचारिक मंथन केलिए भी प्रेरित करता है।

    मैने अपने ब्लाग पर एक लेख लिखा है-शिवभक्ति और आस्था का प्रवाह है कांवड़ यात्रा-समय हो तो पढ़ें और कमेंट भी दें-

    http://www.ashokvichar.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  20. खूने दिल के कतरों से सियाही लेकर
    दास्ताने दर्द की इक ग़ज़ल हम बना आए

    प्रवाह और भाव दोनों बढियां...

    उत्तर देंहटाएं
  21. ummid thi ki fatah jahan karenge, ki sath tu hai to....
    tune nazar kya feri.... har hasrat, har armaan dafna aaye....
    Gud one...

    उत्तर देंहटाएं
  22. बहुत खूबसूरत लिखा है आपने....
    बधाई..

    उत्तर देंहटाएं
  23. अर्चना जी,

    अहसासों से भरी हुई खूबसूरत गज़ल।

    सूखे पत्तों से झड़ गये......

    सादर,

    मुकेश कुमार तिवारी

    उत्तर देंहटाएं
  24. hi, Namaskar ..mein paheli baar iss site pein aaya hunn & 1st mein hi aap ka blog dekha ur all words are awsome really very nice & heart touching....
    keep writing n wish u all da best for eva...
    thnks ,.
    mahesh ,NDLS

    उत्तर देंहटाएं
  25. mn aur aankhon ke bich
    gehraa rishtaa hai
    mn ka nasoor,ankhon se
    ahsq bn ristaa hai

    उत्तर देंहटाएं