बुधवार, 5 अगस्त 2009

इक तारा गर्दिशों में कहीं खो गया



इक तारा गर्दिशों में कहीं खो गया
अपनी ही तन्हाई में तल्लीन सो गया

भटक रहा जुस्तजू की तलाश के लिए
घूम रहा कन्धों पे अपनी ही लाश लिए
इक शायर बदनाम कहीं हो गया

कश्ती क्या डूबती जो चली ही नहीं
रिश्ते क्या टूटते जो बने ही नहीं
अपनी ही कशमकश में ग़मगीन हो गया

इक तारा गर्दिशों में कहीं खो गया
अपनी ही तन्हाई में तल्लीन सो गया



42 टिप्‍पणियां:

  1. कश्ती क्या डूबती जो चली ही नहीं
    रिश्ते क्या टूटते जो बने ही नहीं
    अपनी ही कशमकश में ग़मगीन हो गया

    खुबसुरत भाव ...

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  2. अच्छी रचना, नवीन शिल्प!
    रक्षाबंधन पर शुभकामनाएँ! विश्व-भ्रातृत्व विजयी हो!

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  3. Archana Ji, aise khubsoorat aur bhavsparshi kavya lekhan ke liye bahut sari badhayi. blog ki is duniya me aapse mil kar behad khushi huyi. ummeed hai ab mulaakaat hoti rahegi...!
    aapka bhi MERE AKASH me swagat hai .

    Pratima Sinha

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  4. bahut hi badhiya dang se aap aapani bhawanao ko shabdo me piroya hai .........in bhawanao ki jo aawaj ban gayi hai ........wah bahut hi sundar hai

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  5. बहुत सुन्दर रचना . रक्षाबंधन पर की हार्दिक शुभकामना

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  6. कश्ती क्या डूबती जो चली ही नहीं
    रिश्ते क्या टूटते जो बने ही नहीं
    अपनी ही कशमकश में ग़मगीन हो गया

    दिल को छूने वाला लिखा है......... लाजवाब

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  7. इक तारा गर्दिशों में कहीं खो गया
    अपनी ही तन्हाई में तल्लीन सो गया
    bahut khoobsurat rachana. behatareen

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  8. कश्ती क्या डूबती जो चली ही नहीं
    रिश्ते क्या टूटते जो बने ही नहीं
    अपनी ही कशमकश में ग़मगीन हो गया...bahut achhi

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  9. बहुत ख़ूबसूरत अंदाज़ है
    ---
    'विज्ञान' पर पढ़िए: शैवाल ही भविष्य का ईंधन है!

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  10. पहली बार आपके ब्लोग पर आया. काफी अच्छा सजाया है आपने. गीत भी सुन्दर है .
    हरिशंकर राढी

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  11. भटक रहा जुस्तजू की तलाश के लिए
    घूम रहा कन्धों पे अपनी ही लाश लिए
    इक शायर बदनाम कहीं हो गया


    bahut hi khoobsoorat lines hain..........

    bahut hi behtareen rachna........

    Regards

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  12. इक तारा गर्दिशों में कहीं खो गया
    अपनी ही तन्हाई में तल्लीन सो गया
    ...Lajwab prastuti.

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  13. achchha likhti hain....
    bahut badhai..

    http://puranidayari.blogspot.com/

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  14. Bahut khub..apki lekhni men dam hai.lajwab rachna ke liye badhai.Kabhi Dakiya babu ke yahan bhi tashrif laiye na !!

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  15. behtareen andaaz likhne ka jo hume kafi achcha laga aap hamare blogs par aaye achcha laga

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  16. भटक रहा जुस्तजू की तलाश के लिए
    घूम रहा कन्धों पे अपनी ही लाश लिए
    इक शायर बदनाम कहीं हो गया...

    ..ye meri,aapki, hamari, sabki,sab lekhakoon ki kahani hai...

    aur aap inko shabd dene main kamyaab rahee...

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  17. इक तारा गर्दिशों में कहीं खो गया
    अपनी ही तन्हाई में तल्लीन सो गया...apni tanhayee me kho ke khud apna pata dundte hai...khoobsurat rachna..

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  18. अर्चना जी।
    इस खूबसूरत रचना के लिए,
    शुभकामनाएँ।

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  19. जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ

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  20. जन्माष्टमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाये

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  21. श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। जय श्री कृष्ण!!
    ----
    INDIAN DEITIES

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  22. अर्चना जी तारे गर्दिशों में कभी नहीं खोते ,उनकी चमक से गर्दिशें हवा हो जाती हैं
    आपसे बात करना चाहती हूँ ,न० देंगी

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  23. श्री कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत बहुत शुभकामनाएं !

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  24. रचना बहुत अच्छी लगी....बहुत बहुत बधाई....
    श्री कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत बहुत शुभकामनाएं...

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  25. Bahut khubsurat abhivyakti.

    स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें. "शब्द सृजन की ओर" पर इस बार-"समग्र रूप में देखें स्वाधीनता को"

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  26. स्‍वतंत्रता दिवस की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं. स्वतंत्रता रूपी हमारी क्रान्ति करवटें लेती हुयी लोकचेतना की उत्ताल तरंगों से आप्लावित है।....देखें "शब्द-शिखर" पर !!

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  27. अर्चना जी,
    आपको स्वतंत्रता दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनायें।

    रचना अच्छी लगी।

    आप इतिहास और समाजशास्त्र की विदुषी हैं। आपसे एक निवेदन करना चाहता हूँ। हिन्दी विकिपिडिया पर विभिन्न विषयों एवं टापिक्स पर लेख लिखकर इसे समृद्ध बनाने की महती आवश्यकता है। इससे हिन्दी और हिन्दी-समाज का बहुत हित सधेगा।

    आपसे निवेदन है कि हिन्दी विकि (www.hi.wikipedia.org) पर अपने विशेषज्ञता के क्षेत्र में और अपनी रुचि के अनुसार कुछ लेखों का योगदान अवश्य करें।

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  28. bahut barhia... isi tarah likhte rahiye

    http://hellomithilaa.blogspot.com
    mithilak gap maithili me

    http://mastgaane.blogspot.com
    manpasand gaane

    http://muskuraahat.blogspot.com
    Aapke bheje photo

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  29. अर्चना जी....आपके ब्लॉग पर पहली बार आया.....और एक सांस में सारा होम पेज देख गया.....बड़ा अच्छा लिखती हो आप....न...न...न....चने के झाड़ पर नहीं चढा रहा आपको,सच कह रहा हूँ सच.....!!

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  30. सबसे पहले तो आपका बहुत बहुत शुक्रिया अदा करना चाहूँगा कि आप मेरे blog पर आये,मुझे पढने के लिए अपना कीमती वक़्त दिया और उसके बाद ज़र्रा-नवाजी करते हुए अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की...

    मैं आज पहली दफा आपके blog पर आया हूँ,
    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है आपकी..
    बहुत खुबसूरत लिखा है आपने..
    बहुत बहुत बधाई ..
    ऐसे ही लिखते रहिये और संवारते रहिये blogging की दुनिया को..
    :)

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  31. कश्ती क्या डूबती जो चली ही नहीं
    रिश्ते क्या टूटते जो बने ही नहीं
    अपनी ही कशमकश में ग़मगीन हो गया

    apko pehli baar padha..aur eak hi shabd mila..UMDA!

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