शनिवार, 1 अगस्त 2009

इक रिश्ता आसमानी



चलो इक रिश्ता आसमानी बना लाएँ
जिसकी छाँव में ग़मों को हम भुलाएँ

आगोश में है जिसकी ठंडक चांदनी की
बिखेर रही दोस्ती वही कोमल फिजाएँ

गर्दिश-ए-दौरां से घायल जज्बातों के
ग़मों का इजहार तुझ ही से कर पाएँ

पलकों पे ढलकी अश्कों की बूँदें भी
तेरे दिल की सीपी में मोती बन जाएँ

जन्नत की शबनम बरसती है जहाँ
ऐ दोस्ती तुझे देते हैं फ़रिश्ते भी दुआएँ


(चित्र गूगल सर्च से साभार)

25 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छा लिखा है आपने । भाव, विचार, शब्द चयन और प्रस्तुतिकरण के सुंदर समन्वय से रचना प्रभावशाली बन पड़ी है ।

    मैने अपने ब्लाग पर एक लेख लिखा है-इन देशभक्त महिलाओं के जज्बे को सलाम- समय हो तो पढें और कमेंट भी दें-

    http://www.ashokvichar.blogspot.com

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  2. पलकों पे रुकी अश्कों की बूँदें भी
    तेरे दिल की सीपी में मोती बन जाएँ

    wah :) kabhi humare blog par aayen

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  3. जन्नत से शबनम बरसती है जहाँ
    ऐ दोस्ती तुझे देते हैं फ़रिश्ते भी दुआएँ


    --बहुत उम्दा!

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  4. आगोश में है जिसकी ठंडक चांदनी की
    बिखेर रही दोस्ती वही कोमल फिजाएँ
    ==
    सुन्दर भाव और अतिसुन्दर रचना

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  5. अच्छे भाव की प्रस्तुति।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

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  6. बेहतरीन अभिव्यक्ति!

    दोस्ती का जज़्बा सलामत रहे।
    मित्रता दिवस पर शुभकामनाएँ।

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  7. पलकों पे ढलकी अश्कों की बूँदें भी
    तेरे दिल की सीपी में मोती बन जाएँ
    ....आमीन

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  8. Shabdon ka sundar bhav aur utna hi masum ehsas..badhai.

    फ्रेण्डशिप-डे की शुभकामनायें. "शब्द-शिखर" पर देखें- ये दोस्ती हम नहीं तोडेंगे !!

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  9. जन्नत की शबनम बरसती है जहाँ
    ऐ दोस्ती तुझे देते हैं फ़रिश्ते भी दुआएँ

    bahut he achha likha hai aapne...
    ati uttam...

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  10. इन खुदाओं को न देखो ऐ मिराज़,
    हो सके तो एक मुट्ठी आसमां ही ले आयें.

    भाव अच्छे हैं. और मेहनत करें, निखार आयेगा.

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  11. पलकों पे रुकी अश्कों की बूँदें भी
    तेरे दिल की सीपी में मोती बन जाएँ
    bahut sundar!

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  12. पलकों पे ढलकी अश्कों की बूँदें भी
    तेरे दिल की सीपी में मोती बन जाएँ

    vaah.bahoot naajuki से piroya है इस gazal को आपने.......... lajawaab

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  13. आज मुझे आप का ब्लॉग देखने का सुअवसर मिला।
    सचमुच में बहुत ही प्रभावशाली लेखन है... वाह…!!! वाकई आपने बहुत अच्छा लिखा है। बहुत सुन्दरता पूर्ण ढंग से भावनाओं का सजीव चित्रण... आशा है आपकी कलम इसी तरह चलती रहेगी और हमें अच्छी -अच्छी रचनाएं पढ़ने को मिलेंगे, बधाई स्वीकारें।

    आप के द्वारा दी गई प्रतिक्रियाएं मेरा मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन करती हैं। आप मेरे ब्लॉग पर आये और एक उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया दिया…. शुक्रिया.
    आशा है आप इसी तरह सदैव स्नेह बनाएं रखेगें….

    आप के अमूल्य सुझावों का 'मेरी पत्रिका' में स्वागत है...

    Link : www.meripatrika.co.cc

    …Ravi Srivastava

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  14. भावात्मक अभिव्यक्ति... वाह.. साधुवाद.

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  15. चलो इक रिश्ता आसमानी बना लाएँ
    जिसकी छाँव में ग़मों को भुला जाएँ

    dil ko chhoo lene wali lines..........hain yeh........

    bahut hi sunder bhaav hain...........

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  16. kya khoob likha hai mere dost , mere paas iski taarif ke liye shabd nahi hai , aapne ahsaaso ko itna accha jaama pahnaaya hai ki kya kahun ..


    regards

    vijay
    please read my new poem " झील" on www.poemsofvijay.blogspot.com

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  17. जन्नत से शबनम बरसती है जहाँ
    ऐ दोस्ती तुझे देते हैं फ़रिश्ते भी दुआएँ

    बहुत उम्दा!

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  18. बहुत खूब कहा आपने

    पता चल गया शब्द खो जाने पर कहाँ ढूँढना है



    bahot khub bhai


    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  19. wah wah kya baat hai kitni achi tarah aap kavithayen likhti hai, aap ke bhavnayen mujhe bahut ache lagte hai blog ka name bhi bahut acha hai :-)

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